Thursday, 8 October 2026

ज़ह्ळ को जालंधर कहने वालों का खंडन

देअ श्री श्री श्री खुडीज़ह्ळ जी को जालन्धर कहने वालों का भ्रमभंग - 

भ्रम - प्रभु श्री ज़ह्ळ जी के मुख के सिर में चंद्रमा है तो इन्हें शिव अंश जलंधर कहना भी सही रहेगा।

भ्रमभंग - आपको यह भ्रम देअ, ज़ह्ळ, भनूक में अभेद मानने से हुआ है जबकि इनमें भेद है। जिस मुख की आप बात कर रहे हैं उस पर दो मत है - पहला यह कि यह भनूक है। दूसरा यह कि यह देअ का पुराना भौम मौळिमुख है। अब इसमें पहला पक्ष अधिक प्रचलित है। इस बात से यह सिद्ध होता है कि यह मुख ज़ह्ळ का नहीं है, अतः इससे ज़ह्ळ को जालंधर मानने वाला भ्रम स्वत: निरस्त हो गया। दूसरी बात यह कि चंद्रमा से जालंधर की कल्पना क्यों कर रहे हो सीधे शिव की कल्पना क्यों नहीं करते? यदि कहो कि तो भनूक जालंधर है तो इस पर यह जानना चाहिए कि ऐसी कोई हमारी परम्परा ही नहीं है। येन-केन प्रकारेण जालंधर क्यों सिद्ध करना चाहते हो? 

भ्रम - जालंधर (जलंधर) को पुराणों में सामान्यतः “राक्षस” या “असुर” प्रकृति के पात्र के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन अधिक सटीक शब्द “असुर” है। जलंधर का उल्लेख मुख्यतः शिव पुराण और अन्य पौराणिक परंपराओं में मिलता है। उसे अत्यंत शक्तिशाली असुर राजा बताया गया है। उसकी उत्पत्ति भगवान शिव के तेज/क्रोध से हुआ है। भनुक धराक्स देवता है वह जालंधर भी शिव जी का अंश था वह असुरों का राजा था। 

भ्रमभंग- पुराण आदि में अनेक ऐसे शक्तिशाली राक्षसों का वर्णन मिलता है आपने जालंधर की ही कल्पना क्यों? भनूक की उत्पत्ति शिव के तेज़ से हुई है ऐसी कोई प्रमाण हमारी देव परम्परा में नहीं है। न ही भनूक को असुरों का राजा कहा जाता है। जालंधर शिवांश होने पर भी पूरा राक्षस था पर भनूक आधा राक्षस कहा जाता है। इसलिए ध्राक्सअ कहा । ध्राक्से का अर्थ ही तमोगुण प्रधान देव समझना चाहिए। सामान्य लोक भाषा में आधा राक्षस कहा जाता है। जालंधर की उत्पत्ति भगवान शिव के तीसरे नेत्र की अग्नि और समुद्र के मिलन से हुई थी। यह एक ही बाल रूप में उत्पन्न हुआ था। जबकि भनूक की उत्पत्ति का ऐसा कोई प्रमाण हमारे यहां नहीं है। यदि कहो कि ज़ह्ळ की उत्पत्ति जल में हुई है इसलिए ज़ह्ळ जालंधर है तो इस पर भी यह जान लो कि ज़ह्ळ की उत्पत्ति सरोवर में हुई थी। समुद्र में नहीं। एक साथ सात भाईयों की उत्पत्ति हुई थी। एवं शिव के तेज़ से ज़ह्ळ की उत्पत्ति का कोई प्रमाण नहीं है। 

भ्रम - ज़ह्ळ जल से उत्पन्न हुआ है इसलिए ज़ह्ळ जालंधर है।

भ्रमभंग- जल से तो अमृत, शंख, हलाहल विष, लक्ष्मी, कुवेर, धन्वंतरि, ऐरावत एवं कामधेनु आदि अनेक दिव्य विभूतियों की उत्पत्ति हुई है। उनको जालंधर क्यों नहीं मानते आप? जो जो जल से उत्पन्न हुआ है बो बो जालंधर है ऐसा कोई नियम नहीं है।

इसलिए भनूक/ज़हळ को जालंधर कहना या मानना अनुचित है।  

हर हर महादेव 

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