मोक्षकारणसामग्र्यां भक्तिरेव गरीयसी। स्वस्वरूपानुसन्धानं भक्तिरित्यभिधीयते॥ स्वात्मतत्त्वानुसन्धानं भक्तिरित्यपरे जगुः।
-श्री आद्य शंकराचार्य ।
#तैंतीस_करोड़_देवता_कोटि_नहीं_हैं_ वास्तव में वैदिक दर्शन में "अनन्ता वै वेदा:" प्रमाण से "मंत्र ब्राह्मणयोर्वेद नामधेयम्...
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