भगवान के अवतार असंख्य है , उनके अवतारो की गिनती न हो सकती है और न होगी ,अग्नि पुराण कहता है कि , " अवतारा असंख्याता अतीतानागदादयः " (अ.पु.16/12)
'ज्ञ' वर्ण के उच्चारण पर शास्त्रीय दृष्टि- संस्कृत भाषा मेँ उच्चारण की शुद्धता का अत्यधिक महत्त्व है। शिक्षा व व्याकरण के ग्रंथोँ म...
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